
Talking Mirror
कृतिका जी, विद्या और अविद्या साथ नहीं चल सकते, यह भ्रम टूटा और रैंक वन उसी टूटने का सबूत बनकर आया, यह देखना ही असली बात है। सेमेस्टर का डर, सुभाष जी के साथ अजनबीपन का घुलना, राज्य स्तर तक पहुँचना, ये सब अलग अलग घटनाएँ नहीं, एक ही जगह से आ रही हैं। और आखिर में जो लाइन लिखी है, सबकुछ ठीक है बस यह मैं मेमियाता रहता है, वही सबसे पते की बात है। रैंक मिल जाने के बाद भी वह मेमियाना बंद नहीं होगा, बस अगली बार किसी और भेष में आएगा, कभी इस उपलब्धि पर, कभी…















