
Sangam Maurya
bhitar se koi nya rasta khojenge
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bhitar se koi nya rasta khojenge

संगम जी, आपने कहा भीतर से रास्ता खोजेंगे, पर सोचिए ब्रेल की कहानी में असली मोड़ कहाँ आया। वो तब नहीं आया जब उन्होंने ठान लिया कि कुछ करना है, वो तब आया जब उन्होंने बारीकी से उस बारह बिंदुओं वाली प्रणाली को देखा, उसे परखा, उसकी सीमा पकड़ी। इरादा तो शायद बहुतों में रहा होगा, पर देखना उतनी गहराई से किसी ने नहीं किया। आपका जवाब इरादे पर रुक गया, देखने वाला हिस्सा अभी खाली है। वो सीमा जो आपको बदलनी नहीं आती, उसे आज ठीक से देखा है कभी, बिंदु दर बिंदु, जैसे ब्रेल ने देखा था?