
Nilam Maurya
जो हमारा अहंकार है वो विषय की ओर आकर्षण करता है और हमारे भीतर कामनाओ का इच्छा उत्पन करता है। और हम अपने इच्छा ओं की ओर भागते है . और यहीं पर हमे रुकने का होता है। ये देखने को ये जो इच्छा है कहा से आ रही है , समझना है, और अवलोकन करना है। आचार्य जी ने बताया है















