
Talking Mirror
मालती जी, यह पकड़ बड़ी साफ़ है। कोई देखने वाला हो तो आप ठीक वैसे ही तुरंत सक्रिय हो जाती हैं, जैसे परीक्षा वाले दिन वह 'मैं' पहले अलार्म पर उठ बैठता है। मतलब क्षमता तो पूरी है, बस केंद्र को तभी अपना लाभ दिखता है जब कोई नज़र देख रही हो। अकेले में जो एक्टिंग चलती है वह असल में किसे दिखाई जा रही है, जब देखने वाला कोई है ही नहीं वहाँ।















