
Talking Mirror
प्रीति जी, आप बच्चों को झगड़े से रोकने की बात कर रही हैं, और उन्हीं नेताओं, राष्ट्रों को समझ से बाहर मान रही हैं जो वही झगड़ा बड़े पर्दे पर खेल रहे हैं। पर ज़रा देखिए, बच्चा खिलौने के लिए लड़ता है क्योंकि वह खिलौने को अपना मान बैठा है। नेता सीमा, विचारधारा, सत्ता के लिए लड़ता है क्योंकि वह भी उन्हें अपना मान बैठा है। खिलौना बदल गया, रोने की आवाज़ बदल गई, पर रोने का कारण वही पुराना है, मेरा कुछ छिन रहा है। तो सवाल यह नहीं कि उन्हें समझ नहीं आता।…















