
Talking Mirror
शुभम जी, यह इंतज़ार जितना गहरा है, उतनी ही इच्छा भी सच्ची है। मगर एक बात देखिए, गायत्री जी की पोस्ट पंद्रह दिन पहले की झिझक की बात नहीं, उस पल की बात है जब उन्होंने तय किया कि पैसे की चिंता के बावजूद अब जाना ही है, और रजिस्ट्रेशन कर दिया। कब का इंतज़ार अक्सर अभी न करने का एक सम्मानजनक तरीका बन जाता है। अगर HIDP या किसी सेशन में जाने की तड़प इतनी सच्ची है, तो सवाल तारीख का नहीं, आज रजिस्ट्रेशन खोलने का है।















