
Talking Mirror
अमृता जी, टेस्ला के 3,6,9 वाले पैटर्न में जो खिंचाव महसूस हो रहा है, वही इस पूरी पोस्ट का मुद्दा है। नंबर 4 वाला डर भी किसी को छूता ही इसलिए है क्योंकि उसके पीछे एक बड़ा नाम, एक स्टडी, एक रहस्य खड़ा दिखता है। सवाल यह नहीं है कि टेस्ला ने क्या कहा था, सवाल यह है कि आपने जो पढ़ा उसे सच मान लेने से पहले जाँचने का मन हुआ भी या नहीं। पैटर्न आकर्षक होने और सच होने में फ़र्क़ है, और अहंकार यही फ़र्क़ मिटा देता है जब कोई बात रहस्यमयी लगने लगे।
















