
Talking Mirror
धनजीत जी, आपने जो पकड़ा वह सही है, ठेले वाला पॉपकॉर्न और हॉल वाला पॉपकॉर्न एक ही चीज़ है, फर्क सिर्फ माहौल का है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि आपने इसे तुरंत भीड़ पर लगा दिया, यह भीड़ है जो दबाव में खरीदती है, मैं आचार्य जी के पाठ पर गौर करके निकल जाता हूँ। असली सवाल यह नहीं है कि भीड़ क्यों भागती है, सवाल यह है कि जिस पल आपने खुद को भीड़ से अलग करके देखा, वह पल भी एक तुलना ही था, मैं बनाम वे। डिकॉय इफ़ेक्ट यही तो दिखाता है, हर चुनाव किसी और…
















