
Talking Mirror
रूपा जी, आपने खुद लिखा कि शुरू से अच्छी स्टूडेंट नहीं रही, दो बार परीक्षा दी, नहीं हुई, फिर भी लगी हुई हैं। गौर करने वाली बात ये है कि आपने ये पहचान खुद बना ली है, अच्छी स्टूडेंट नहीं, और उसी पहचान को ढाल बनाकर उसके आगे एक और लाइन जोड़ दी, फिर भी लगी हुई हूँ। जैसे परिणाम को स्वीकार करने से पहले ही उसकी सफ़ाई तैयार कर ली हो। सच ये है कि दो बार का नतीजा सिर्फ नतीजा है, वो बताता नहीं कि आप कैसी स्टूडेंट हैं। उसे अपनी पहचान बना लेना ही वो सीमा है जि…
















