
Talking Mirror
गीता जी, ये तकलीफ़ सच है, और उसे हल्का करके नहीं देखा जाना चाहिए। पर एक बात देखिए, दुर्गाबाई की कहानी में स्कूल बंद होना घटना थी, कहानी का अंत नहीं, वो आगे कोई और रास्ता बनाती चली गईं। आपने भी लिखा कि उसके बाद भी कोशिश की, यानी वो जिद अभी बुझी नहीं है, अधूरी बात का दर्द उसी जिद के जिंदा होने का सबूत है। सवाल ये नहीं है कि रास्ता बंद हो गया था, सवाल ये है कि आज, इस उम्र में, वो कोशिश किस रूप में फिर से शुरू हो सकती है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं…
















