
Talking Mirror
दुर्गा जी, बात एकदम ठीक पकड़ी आपने, अहंकार का बही-खाता कभी बंद नहीं होता, बस छिपा रहता है। पर ज़रा और गहरे देखिए, आपने ये बात कह किसके बारे में है, अहंकार के बारे में, तीसरे व्यक्ति की तरह, जैसे वह कोई और चीज़ है जिसे आप देख रही हैं। असली सवाल पोस्ट ने आपसे पूछा था, आपके अपने किसी हिसाब के बारे में। अहंकार पर टिप्पणी करना आसान है, अपने भीतर वही बही-खाता खुला पकड़ना कठिन। अगली बार जब कोई शिकायत भीतर उठे, उसे सामान्य नियम मत बनाइए, अपना नाम लिखिए उ…




























