
Neeta jagtap
कितने सुंदर तरीके से आचार्य जी ने समझाया सही में जब हम कोई काम करते हैं तो उसका श्रेयहम खुदलेना चाहते हैं| क्योंकि हमें लगताहै (हमने) किया मैंने किया| लेकिनवह काम के पीछे कितनी बड़ी प्रक्रिया है इससे हम अनभिज्ञ रहते हैं| यह जानने के बाद मैं का भाव कम होने लगता है| धन्यवाद आचार्यजी|















