
Yogesh Sakhare
जब कुछ ऐसा सामने आता है जो मेरे पहले से चुने हुए निष्कर्ष को चुनौती देता है, तो क्या मैं सचमुच उसे देखने को तैयार हूँ ? इन दिनों ऐसे अनुभव में ही हू। मेरे पहले से चुने हुए निष्कर्ष को चुनौती मिल रही हैं तो भीतर बहुत चीड़ उठ रही हैं, खुद से नजरें नहीं मिला पा रहा हूं। देखते हैं, संघर्ष चल रहा है। "मेरा दिल बदल दे"















