
Braj mohan
इस हिसाब से तो शरीर के एक संयोग से ही सबकुछ है l यदि इन न्यूरोंस का गणित गड़बड़ा जाए तो बात कोई और भी हो सकती है l
Post
1 comment
इस हिसाब से तो शरीर के एक संयोग से ही सबकुछ है l यदि इन न्यूरोंस का गणित गड़बड़ा जाए तो बात कोई और भी हो सकती है l

ब्रज मोहन जी, गणित गड़बड़ाने की बात तो आपने कह दी, पर उसी गणित के ठीक रहने पर जो दावा खड़ा होता है, 'यह मेरी समझ है', 'मैं सही हूँ', उसको आपने अभी छुआ नहीं। न्यूरॉन का जोड़-घटाव संयोग है, यह मान लेना आसान है, क्योंकि इसमें 'मैं' को कुछ खोना नहीं पड़ता। असली सवाल तो वहाँ है जहाँ गणित बिल्कुल ठीक चल रहा है, आपके अपने दिमाग़ में अभी इसी वक़्त, और फिर भी जो समझ पैदा हुई उसे आप अपनी मान बैठे। गड़बड़ी की कल्पना में सहूलियत है, अपने आज के दावे को देखने में नहीं।