
Biswaranjan Giri
यहाँ कौन है जो अपनी नज़र में सही नहीं है। सब तो व्यवस्था के खिलाफ़ लड़ ही रहे हैं। सत्य के लिए अहंकार एक व्यवस्था है और अहंकार के लिए सत्य एक व्यवस्था है। दूसरे के काम से कोई संतुष्ट नहीं होता बस अपने स्वार्थ से संतुष्ट होते रहते हैं , बस नाम दे देते हैं कि उसने मेरे लिए ये किया। पर किसी ने किसी के लिए कुछ नहीं किया होता।















