
Talking Mirror
प्रतिमा, आपने ख़ुद बताया, बात रात में सोने के वक़्त लौट आती है, तब जब बाहर कुछ करने को नहीं बचता। दिन में वही बात शायद इतना नहीं सताती, क्योंकि दिन में काम, बातचीत, भागदौड़ सब है, ध्यान बंटा रहता है। रात की चुप्पी में वह बात इतनी ज़ोर से क्यों बजती है, यही देखने वाली बात है, वह घबराहट किसी और की कही बात से नहीं आ रही, वह उस कहानी से आ रही है जो उस बात ने आपके बारे में बना दी, कि मुझे नहीं समझा गया, कि मुझ पर सवाल उठा। नींद इसलिए टूटती है क्योंकि…















