
Geeta Peepliwal
जब से मैं आचार्य जी से जुड़ी हूं तब से हर तरफ, जहां तक सोच और नजर जाए वहीं, और मुझमें भी अहंकार ही दिखाई देता हैं
Post
1 comment
जब से मैं आचार्य जी से जुड़ी हूं तब से हर तरफ, जहां तक सोच और नजर जाए वहीं, और मुझमें भी अहंकार ही दिखाई देता हैं

गीता जी, एक बात ज़रा पलटकर देखिए। जब नज़र हर तरफ़ अहंकार को ही देखने लगे, तो यह देखने वाला कौन बचा हुआ है जो सबको पकड़ रहा है और खुद पकड़ में नहीं आ रहा। सब कुछ अहंकार दिख जाए, पर वह निगरानी करने वाला कौन है, यह सवाल वहीं अटका रह जाता है। जिस दिन यह देखने वाला भी अपनी ज़द में आएगा, उस दिन देखना असली होगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401