
Ranjeet Kumar
मेरे जीवन में जो भी हो रहा है,इसमें मेरा चुनाव कोई है ही नहीं सारा का सारा देखकर,सुनकर,ही अपनाया हुआ है,जब कभी भी बीमार पड़ा तो सुई और टैबलेट में सिर्फ चुनाव किया टैबलेट को क्योंकि पीछे डर था। अन्ततः ये भी चुनाव डर का ही है इस लीक पर जीवन जी रहा हु कि आगे के जीवन में भी दूर तक अपना चुनाव की कोई जरूरत ही नहीं लग रहा है ।
















