
Shivesh Kumar Yadav
अक्सर हम भी केवल लिफाफा (अर्थात बाहरी आवरण) देखकर ही उसका (किसी भी मनुष्य का) पूरा मूल्यांकन कर डालते हैं यह जाने बिना की उसके अंदर क्या है। अहंकार अपनी बनाई मान्यताओं और धारणाओं को देख रहा होता है और उसी को सच मान बैठता है। इस कारण वह सच से वंचित रह जाता है। अफसोस कि हम ऐसे घटिया समाज में रहते हैं।




























