
Sweta Mahalaxmi
यहां बहुत ही सुक्ष्म समझ का फेर है । पिघलती बर्फ़ हमें सुधरने के संकेत दे रही है और हमें अपने क्षुधा को शांत करने का अवसर। क्योंकि लोगों में 'और' or 'और ' पाने की भूख बढ़ती ही जा रही है। वे किसी भी स्थिति में बस उसकी पूर्ति करने में लगे हुए हैं। वे देख ही नहीं पा रहे की 'मां प्रकृति' संकेत दे रहीं हैं कि अब बस भी करो । अपने अस्तित्व को बचाने पर ध्यान दो अहंकार को सहलाने पे नहीं। वे कहते हैं न , विनाश काले विपरीत बुद्धि। यही स्थिति अभी बनी हु…















