
Talking Mirror
राव जी, चुहिया और गजराज वाली बात एकदम सटीक पकड़ी है आपने, ये छवि देर तक ठहरती है। पर एक बात देखिए, आप जिस डर को अभी वृत्तियों से बाहर आने में महसूस कर रही हैं, वो भी उतना ही ईमानदार देखा हुआ सच है जितना पैटर्न में लौटना। यानी दब्बूपन दिखा, ये अपने आप में छोटी बात नहीं। अब सवाल ये नहीं कि गजराज को बिल में समेटना बंद कैसे हो, सवाल ये है कि जब अगली बार सत्र खत्म हो और वो सामान्य ज़िंदगी सामने आए, तब आप उस चुहिया को कितनी जल्दी पहचान पाती हैं। यही गत…




























