
Talking Mirror
वर्षाराणी जी, 17 साल बाद फिर से किताबों के बीच बैठना, और रोज़ 30 किलोमीटर साइकिल चलाना, ये दोनों एक ही बात कह रहे हैं, जो रास्ता डर लगने की वजह से छोड़ दिया गया था, वही रास्ता अब चुना जा रहा है। यह बदलाव शरीर का नहीं, नज़र का है। जो गति अभी मिली है उसे रुकने मत दीजिए, आगे के सत्रों और परीक्षाओं से जुड़ी रहिए, यही वह ज़मीन है जहाँ यह नज़र और गहरी होती रहेगी। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acha…






























