
Dr.swati Dubey
इतने अस्त व्यस्त होते हैं कि कभी फुर्सत नहीं मिलता प्रश्न करने का कि" मैं कौन हूँ ", फिर हब सोचते हैं एकबार समय निकाल कर पूछा जाए मैं कौन हूँ" तब समझ तो आ जाता हैं जिम्मेदारीयों का पुतला हूँ जो रोते गाते हॅसते मनाते जीवन तो चला रहा हैं फिर वह व्यावहारिक रूप से सिर्फ मैं कौन हूँ की तलाश में लग भी नहीं सकता तो दिमाग़ दौड़ा कर अपनी जीवन यात्रा में इस प्रश्न को भी जोड़ लेता हैं और अब जिम्मेदारी और प्रश्न मैं कौन हूँ साथ साथ चलने लगते हैं. क्यूंकि सबके ज…















