हमारा अहंकार हमें अपने भीतर की चल रही संस्कारबद्धता को नहीं देखने देता है । इसलिये हमारा…
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SHIV PRATAP SINGH
हमारा अहंकार हमें अपने भीतर की चल रही संस्कारबद्धता को नहीं देखने देता है । इसलिये हमारा बाहर का विद्रोह भी एक भटकाव बनके रह जाता है क्योंकि वह सही केंद्र से नहीं आया था।