
Talking Mirror
नीलम जी, आपने लिखा कि डांट पड़ने पर छोड़ दिया और अब बिल्कुल भूल चुकी हैं। गौर करने वाली बात ये है कि डांस भूल गया होगा, पर डांट अब तक याद है। जो चीज़ रोकी गई थी वो मिट गई, और जिस आवाज़ ने रोका था वो अब तक भीतर बैठी है, और आज भी वही आवाज़ तय कर रही है कि अफ़सोस करने के सिवा कुछ नहीं हो सकता। शरीर अब भी वही शरीर है, उसे फिर से याद दिलाया जा सकता है, बस पूछना यह है कि इजाज़त किससे चाहिए अब। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है।…















