
Sumita
मुझे हमेशा यही बात मन मे चलता रहता है कि अब तो शादी हो गई है, बच्चे बडे हो गये है तो पति चाहे जैसा हो साथ रहना ही पडेगा, नही तो समाज क्या कहेगा । जिस समाज मे रह रही हूँ, उससे अलग कैसे चल सकती हूँ ? अलग चलने के लिए तो इस समाज से भी अलग होना पड़ेगा न । इसलिए वेचैनी होती है । आगे बढ़ने कि नियत है पर कैसे बढु ?




























