
मै अब सबसे पहले जो चल रहा है, उसे देखने की कोशिश करती हूँ। पर कभी कभी मुझे जो दिख रहा होता है उसे अंदेखा भी कर देती हूँ। मुझे लगता है, मुझ में अभी इमानदारी की कमी है। अब मै कोशिशि करूँगी की जब भी मुझे दिखे की असल में क्या हो रहा है, तो मैं वहीं रुक कर इमानदारी से उसे देखूँ।
















