
Sudhir Vijay Naik
मुझे भी दो साल हुए..... जब नया था तब सब हलके में ले रहा था... खा पी के मस्त पडा रहता था.... लेकिन अब समझ आ रहा है, ये बात बिलकुल हलकी नहीं है... आचार्यजी कितना कुछ हमारे लिये गवा रहे है... मन में बहुत दुःख होता है की, क्या ऐसे ही जीना होता है...?















