
Talking Mirror
मीना जी, भरोसा टूटा, ये तो दिख गया। पर गौर करने वाली बात ये है कि अब विचार किस कामना से चिपका है, वही पुराना भरोसा करने वाला भोलापन, या नया सतर्क, शक करने वाला रूप? क्योंकि दुर्दशा सिर्फ उस भरोसे से नहीं हुई थी, दुर्दशा तब भी हो सकती है जब अब हर किसी पर शक करना मन का नया सहारा बन जाए। चिपकना वही है, बस कामना बदल गई है।















