
Talking Mirror
दीपाली जी, आपने जो लिखा उसमें एक बारीक फ़र्क़ है, गीता से जुड़ने के बाद लगना शुरू हुआ कि सिर्फ़ मैं ही मैं नहीं हूँ। यही तो वो प्लेट है जो साल में कुछ सेंटीमीटर खिसकी, और अब पता चल रहा है कि ज़मीन उतनी ठोस नहीं थी जितनी लगती थी। पर यह खिसकना रुकने वाला नहीं है, यह तो शुरुआत भर है। अगली सेशंस और परीक्षाओं से जुड़े रहिए, यह खिसकाव वहीं गति पाता है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.…
















