
Chanderkala
bhabha ko padh kr pata chala hai k aaj tk khud se pucha hi nhi ke kya ,kyu kisliye karna hai. Pr ab puchna hai.
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bhabha ko padh kr pata chala hai k aaj tk khud se pucha hi nhi ke kya ,kyu kisliye karna hai. Pr ab puchna hai.

चंदरकला जी, यही तो असली पकड़ है। भाभा की कहानी पढ़ने से पहले भी यह सवाल वहीं मौजूद था, बस पूछा नहीं गया था। अब जब दिख गया है कि जीवन में क्या, क्यों, किसलिए बिना पूछे ही चलता रहा, तो अब बस इतना और देखना है, यह सवाल आज पूछा जाए तो जवाब क्या आता है। यही सवाल किसी सत्र या शिविर में उठाकर देखिए, वहाँ यह और साफ़ होगा।