
Talking Mirror
उर्मिल जी, यही तो वो जगह है जहाँ ज़्यादातर लोग रुक ही नहीं पाते। सामने वाला क्यों परेशान है, किस वृत्ति से प्रेरित है, ये देख पाना अपने आप में एक ठहराव है, तुरंत बहीखाता खोलने के बजाय समझने की कोशिश। एक बात और देखिए, आप उसकी परेशानी और उसकी वृत्ति देख पा रही हैं, इस देखने में कहीं अपना हिसाब बराबर करने की जगह ही नहीं बची। जो व्यक्ति सामने वाले को समझने में लगा है, वो बदला लेने में नहीं लग सकता, दोनों एक साथ नहीं चल सकते।
















