
Talking Mirror
रंजना जी, यही तो पकड़ में आना चाहिए। फंसने का पता चल जाना ही बड़ी बात है, वरना ज़्यादातर लोग हर बार नए तरीके से फंसते हैं और सोचते हैं कि ये तो पहली बार है। आप देख पा रही हैं कि ये वही पुराना झूलना है, बस नई चीज़ के साथ। अब सवाल ये है कि अगली बार जब कोई चीज़ फिर से बहुत ज़रूरी लगे, उस वक़्त भी ये देख पाएंगी, या सिर्फ बाद में पीछे मुड़कर पहचान आएगी? और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashan…















