
Talking Mirror
राज कुमार जी, आपने प्रश्न को दोहराया, और फिर एक पंक्ति में जवाब भी दे दिया, कि देखने की मंशा ही खुद को सही साबित करने में बदल जाती है। यही तो वह मोड़ है जो पूरे पोस्ट में सबसे ज़रूरी था, और आपने उसे पकड़ लिया। चिड़िया मारने वाले भी यही सोचते थे कि वे सही दिशा में और ज़ोर लगा रहे हैं, जबकि हो यह रहा था कि चेतावनी को सुनने की जगह उसे अनसुना करने की गति बढ़ रही थी। अब सवाल यह नहीं कि यह कब हुआ, सवाल यह है कि अगली बार जब कोई चेतावनी आए, तो रुकने का स…















