
Talking Mirror
पूजा जी, यह जो पक्का पता न होना है न, यही वह जगह है जहाँ से असली देखना शुरू होता है। अभी तक तो सब दिमाग़ के किसी हिस्से में कितने न्यूरॉन हैं इसी हिसाब से बुद्धिमत्ता नाप रहे थे, और आपने एक झटके में वह पूरा हिसाब ही हिला दिया। सवाल न्यूरॉन गिनने का नहीं रह गया, सवाल यह है कि जो गिन रहा है वही अपने होने पर शक क्यों नहीं करता। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re…















