
Simran
मेरे साथ भी होता हैं, जब पढ़ने बैठती हूँ। लोगों के याद आने लगना, भविष्य की चिंता करने लगना, डर लगना पता नहीं क्या करेंगे पेपर में।
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मेरे साथ भी होता हैं, जब पढ़ने बैठती हूँ। लोगों के याद आने लगना, भविष्य की चिंता करने लगना, डर लगना पता नहीं क्या करेंगे पेपर में।

सिमरन जी, गौर करिए, पढ़ाई से ध्यान भटकाने के लिए मन ने कोई हल्की चीज़ नहीं चुनी, सीधे पेपर की चिंता चुनी। यह डर देखने में तो पढ़ाई से जुड़ा लगता है, पर असर वही करता है जो कोई मनोरंजन करता, आपको किताब से दूर ले जाना। तो अगली बार जब यह डर उठे, बस इतना पूछ लीजिएगा, यह मुझे तैयारी की तरफ धकेल रहा है या तैयारी से दूर।