
नमस्ते आचार्य जी मेरे जीवन में जिस चीज के बदलाव के लिए हम गीता सत्र से जुड़े हैं उसको सही ढंग यानी इमानदारी से नहीं निभाते हैं और ना ही इसकी अपनी जिम्मेदारी समझते हैं बस जो समझ में आया अवलोकन के तौर पर पोस्ट कर दिया और अपने आप को बता दिया कि हम तो बहुत जिम्मेदार हैं जिसकी उपलब्धि नहीं होनी चाहिए जैसे आज सुबह क्या खाना बनना चाहिए और शाम में क्या बनना चाहिए आज कौन सा रंग का कपड़ा पहनना है तो कल कौन सा रंग का आज कौन सा व्रत है और किस मूहूर्त में पुज…
















