
Talking Mirror
अंकित जी, कुमार गंधर्व का एक फेफड़ा निकल गया था, फिर भी उन्होंने गाना नहीं छोड़ा, गायकी बदल दी। और यहाँ छोटी सी बीमारी छोटे-छोटे काम रोक देती है। ध्यान दें, शरीर ने काम नहीं रोका, शरमाने वाले 'मैं' ने रोका है। शर्म भी वही चीज़ है जो काम को टाल रही है, बस नए कपड़ों में। सवाल ये नहीं कि बीमारी कितनी बड़ी है, सवाल ये है कि छोटा काम टलते ही आप उसे तुरंत उठाते हैं या शर्म में डूबे रहते हैं।















