
मेरे जीवन में किसी और की पसंद को अपनी पसंद बनाना अपने जीवन में नर्क घोषित करने के समान है ।जैसे पिता द्वारा शादी के लिए पसंद किए लड़के को अपनी पसंद बनाना। उनकी पसंद को अपना लेना अब जीवन में कैसा ही संघर्ष ,मानसिक स्थिति हो जीवन तो जीना ही पड़ेगा और बिना सोचे समझे सही चुनाव नहीं किया समाज द्वारा बनाए गए विवाह के बंधन में बंधे रहना यही नर्क है पिता से बांधी यह आशा की वह मेरे लिए सही जीवन साथी चुन रहे हैं।
















