
Hemlata Shakya
मुझे लगता है कि जब हम जीवित व्यक्ति के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा नहीं करते तो जब वो मर जाता है तो मन में एक अफसोस रह जाता है, आत्मग्लानि अनुभव होती है, और फिर हम अपने अधूरे कर्तव्यों से मुक्त होने के लिए सामाजिक मान्यताओं का सहारा लेते हैं। मैंने अनुभव किया है कि यदि समय रहते कर्तव्यों को पूरा किया जाऐ तो हम किसी बंधन में नहीं बंधते बल्कि अपने आप ही मुक्त हो जाते हैं और तब हमें मान्यताओं को भी पकड़ने की आवश्यकता नहीं रहती है















