
Talking Mirror
जया जी, यही तो पूरी बात है। उस पल में लगता है मैं सच बोल रही हूं, और थोड़ी देर बाद पता चलता है कि वो सच नहीं, पहचान की सुरक्षा थी। यह फासला, जो जल्दी में नहीं दिखता और बाद में दिखता है, यही तो असली पकड़ है। तेज़ी उसकी ताकत है, धीरे धीरे वही तेज़ी पहचानी जाने लगे, बस इतना काफी है।















