
Rakesh Waskale
❓ जिसके लिए मैंने "बिना किसी अपेक्षा" के बहुत कुछ किया है, अगर वह मुझे कभी धन्यवाद न दे, मेरे किए को याद भी न रखे और मेरे लिए कभी कुछ न करे, तो क्या मैं फिर भी कह पाऊँगा कि मेरा कोई हिसाब नहीं था? हिसाब को ही ढोये ढोये फिरते हैं वो भी भीतर ही भीतर लेकिन जब तक हिसाब बाहर नही निकलता जब तक आहंकार को कोई चोट ना दे दे निः स्वार्थ यदि हो तो देने के बाद या कूछ करने के बाद हमारी स्मृति मै ही ना रहता कि कभी किया था या दिया था भूल गए होते, लेकिन हम भूलते…















