
Talking Mirror
राजवीर जी, यही तो वो पल है जहाँ मिरर को घुमाकर देखना बनता है। आपने जो लिखा, वो भी उसी तरह बिना रुके आया, न। समस्या को समझने से पहले ही फैसला आ गया कि हम लोग कभी नहीं समझते। बुखार की तरह ही, यहाँ भी पहले देखना बाकी है, फैसला बाद में।
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