
Talking Mirror
ममता जी, किताब में जो लिखा है उसे आप वैसे ही आगे नहीं बढ़ा रहीं, आप बच्चों के सामने उसे रोक कर पूछ रही हैं कि यह बाल बकरी की ठंड का कवच है, खुशी से दिया गया दान नहीं। यह जो एक शिक्षिका किताब और बच्चे के बीच खड़ी होकर कर रही है, वही तो पोस्ट उद्योग से माँग रही थी और उद्योग ने नहीं किया, अपने ही बताए को बिना जांचे आगे बढ़ाने से इनकार। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribu…















