
Seema Kumari
अहंकार ऐसा बेहोश होता है कि वो विषय में इस तरीके से चिपक कर लिप्त हो जाता है की वह विषय को ही अपना सब कुछ मान लेता है । अहंकार को न जाने क्यों नए-नए अनुभव में यानी खुद को पूर्णता भूल जाने में या फिर किसी विषय से दूर हो जाने में इतना डर क्यों लगता है । क्योंकि वह बेहोश है , लेकिन उसकी मूलवृति ही यही है कि अहंकार खुद को भूलकर आत्मा में लिप्त हो जाना ।















