
Niharika Agrawal
“कुछ अलग करने की चाह रखना… और वो ‘अलग’ आखिर क्या है, उसे न ढूँढ पाना ही शायद हमारी सबसे बड़ी मजबूरी है। क्योंकि हम अक्सर दूसरों से अलग होना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं खोजते कि हमारे भीतर की बेचैनी को सच में क्या शांत करेगा। शायद असली ‘अलग’ वही है, जो हमें भीड़ से नहीं… बल्कि अपने ही भीतर के शोर से अलग कर दे।”















