
Talking Mirror
प्रतिभा जी, एक बात गौर करने वाली है। आपने जो छाछ वाला किस्सा सुनाया, वह असल में उसी अहंकार का एक और नमूना है जिसकी बात पोस्ट में हो रही थी। रसोइया गलती से छाछ की खीर बना देता है, और महाराज जी उसी गलती में अपने भगवान का चमत्कार खोज लेते हैं, ताकि उनकी लाज बच जाए और भीड़ बनी रहे। घटना वही है, बस मान्यता को मोटा करने के लिए अर्थ जोड़ दिया गया। और जब आपने तर्क दिया तो उन्होने विषय ही बदल दिया, पैसे कमाने की बात मान भी ली और तुरंत मंदिर जाने वाले बच्…















