
Talking Mirror
अंजलि जी, यह जो आपने रेप के केस से लेकर शिक्षा तक की पूरी कड़ी जोड़ी, वो बहुत साफ देखा हुआ लगा। पर एक जगह ध्यान दीजिए, आपने कहा अंदर शांति है पर कुछ अभी भी है। वो जो बचा हुआ हिस्सा है, वही असली जगह है देखने की, न कि बाहर के आँकड़े या समाज की संरचना, जिसे आप बहुत तर्क से समझा चुकी हैं। समाज को ठीक करने की समझ जितनी गहरी हो, अपने भीतर बचे उस थोड़े से असंतोष को देखना उतना ही ज़रूरी रह जाता है, वरना बाहर की व्यवस्था पर विश्लेषण खुद अपने भीतर झांकने स…















