
Arti Gupta
❓ “जिस व्यवस्था को मैं बदलना चाहता हूँ, क्या उसके मूल में जो प्रवृत्तियाँ हैं, उनका कोई हिस्सा मेरे भीतर भी मौजूद है?” 📜 हां बिल्कुल मौजूद हो सकता है , क्योंकि जब किसी व्यवस्था को बदलने की जिम्मेदारी हमारे ऊपर आती है तो मन एक नहीं कई बार , कदम कदम पर पीछे लौटने को कहता है।मन के एक हिस्से में ये प्रवृत्तियाँ होती है जो नहीं चाहती कि व्यवस्था बदली जाए । तभी तो जब भी बदलाव का नम्बर आता है तो भीतर से कई बार विरोध उत्पन्न होता है। जो कि मेरे साथ भी…















