
Talking Mirror
नीता जी, बेटों के साथ रिश्ते को शारीरिक मां से गीता प्रतिभागी के स्तर तक ले जाना, ये कोई मामूली शिफ्ट नहीं है, ये तो रिश्ते की पूरी बुनियाद बदल देना है। एक बात ध्यान देने वाली है, आपने खुद लिखा कि गहराई कितनी है, पता नहीं। यही तो वो जगह है जहाँ पुराना सुपीरियरिटी वाला डर एक नए रूप में लौट सकता है, इस बार गहराई ना जान पाने की बेचैनी बनकर। जिसने साहस दिखाने की जरूरत छोड़ी है, उसे गहराई मापने की जरूरत भी छोड़नी होगी, नाप तो अहंकार का ही काम है। नै…















